About Us

The Press Club Through The Ages

The Greater Noida Press Club was founded on 24 July 2003 as a professional and cultural platform for journalists working in the city of Greater Noida. The Press Club’s original objectives included encouraging the highest standards of professional integrity and skill in the reporting of news; helping educate a new generation of journalists; and contributing to expanding the freedom and independence of the Fourth Estate.


The idea of setting up a Press Club emerged in 2003. Journalists were the lowest-paid white-collar employees those days, and they had to fight every inch of the way to get their due. During the course of this struggle, they found that even in smaller cities such as Meerut, Muzaffarnagar, Shamli journalist unions had founded press clubs and had set up their own buildings. Decided that they should have one in Greater Noida too. A delegation of journos led by Adesh Bhati, Satyaveer Nagar and Dharmender Chandel approached the Mulayam Singh Yadav, the then Chief Minister of Uttar Pradesh. Mr.Yadav is a forward-looking politician and he knew journalists from close quarters. He told the delegation that he had been impressed when he visited the Press Club of Delhi, and that he would help to secure a similar facility for journalists in Greater Noida.

Brijesh Kumar, the then Chairman cum Chief Executive Officer (CCEO) of Greater Noida, was another person who felt that city journalists ought to have a place they could call their own. He too offered a helping hand. But due to some circumstances the activities and working of Greater Noida Press Club, was turned lazy. In the starting days of 2013 many journalists like Pankaj Parashar, Rohit Priyadarshan and Rajesh Bhati felt to review the organization again. Now the Greater Noida Press Club has been rearranged and working speedy to achieve their targets.

Aims and Objectives

The aims and objects of the Club are:

 to provide members means of professional, educational, social, cultural and recreational activities and to establish, maintain and conduct a Club for the use and benefit of members, their families and guests, and maintain a Club house.
b. to open and maintain Club branches in more than one location within the Greater Noida and Noida Region.
c.  to provide, as may be feasible and convenient, facilities such as reading room and library for the use of members.
d. to establish and/or support institutions and activities designed for training of working journalists and advancement of their professional skill and equipment. 
e. to provide wherever feasible and in the general interest of the members, assistance in support of the other organizations of working journalists.
f. to provide, to the extent feasible, facilities for holding press conferences, meetings, symposia and activities of professional interest.
g. to purchase, hire, make, provide or maintain and/or dispose of all kinds of furniture, utensils, glassware, linen, books, papers, periodicals, stationery, cards, games and other material required for the functioning of the Club.
h. to make, buy, prepare, supply and sell all kinds of provisions and refreshments as may be required, and generally to carry on the business of a hotel, restaurant, cafe, tavern, refreshment room or a lodging house, for the benefit and convenience of the members, their families and guests.
i. to purchase, take on lease or in exchange or otherwise acquire land, building or property movable or immovable, for the Club and to sell any of its acquisition.
j. to promote and/or finance on its own or in co-operation with other institutions project for the education and training of journalists, by way of grants, awards, scholarships and such other means.
k. to provide relief to ordinary and honorary members and/or their families in indigent circumstances.
l. to provide to the extent feasible and at reasonable charges temporary lodging and allied facilities for visiting journalists.
m. to construction and maintain housing facilities to members in one or more location within the Greater Noida, Yamuna Expressway Industrial Development Authority and Noida Region.
 n. to carry on all such other lawful activities as are incidental or conducive to the attainment of the above objects.


स्मृति पत्र

1.संस्था का नाम  ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब
2.संस्था का पूरा पता  जे 267, सेक्टर बीटा-2, ग्रेटर नोएडागौतमबुद्ध नगरउत्तर प्रदेश, 201308
3.संस्था का कार्य क्षेत्र  समस्य मेरठ मंडलमेरठ होगा
4: संस्था के उद्देय एवं लक्ष्य
1: जनपद के समाचार पत्रों, न्यूज चैनलों, पत्रिकाओं, रेडियो, डिजिटल पोर्टलों एवं अन्य संचार माध्यमों में कार्यरत पत्रकारों के हितों के लिए कार्य करना।
2: पत्रकारों को बीमा, बैंकिंग एवं अन्य व्यवसायिक गतिविधियों के माध्यम से लाभ पहुंचाना।
3: बीमारी या कोई दूसरा शारीरिक कष्ट होने पर उपचार आदि के लिए सहयोग करना।
4: पत्रकारों, उनके बच्चों एवं परिवार के सदस्यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, शैक्षिक पाठ्यक्रम एवं शिक्षण संस्था की स्थापना एवं संचालन करना।
5: समय-समय पर खेलकूद, शैक्षणिक, सामाजिक प्रतियोगिताएं, सम्मान समारोह एवं विशेष अवसरों पर समारोह आदि का आयोजन करना।
6: विचार गोष्ठियां, कार्यशाला, सभा, योग, रक्त दान एवं चिकित्सा शिविर, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विषयों पर परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करना।
7: वाचनालय, पुस्तकालय, ट्रस्ट और क्लब आदि की स्थापना एवं संचालन करना।
8: राष्ट्रीय एवं अंतर राष्ट्रीय स्तर पर संचालित संस्थाओं से संपर्क एवं सहयोग ले अथवा देकर कार्यक्रम संचालित करना।
9: पत्रकारों एवं उनके परिवारों के लिए आवासीय सुविधाओं का विकास करना।
10: आपदा के समय सरकारी एवं सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से बचाव और राहत कार्यों में योगदान देना।
11: समाज में व्याप्त कुरीतियों का उन्मूलन करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित करना।
12: सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की सूचनाएं आम आदमी तक पहुंचाना। इन सेवाओं के लाभ आम आदमी को दिलाने का प्रयास करना।
13: पत्र, पत्रिका, पुस्तक, कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन, वेब पोर्टल आदि की स्थापना, प्रकाशन एवं संचालन करना।
14: संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संस्था के नाम से जमीन या भवन आदि खरीदने, किराए पर लेना-देना, निर्माण करना।
15: संस्था एवं संस्था के कार्यक्रमों को संचालित करने के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति करना। भारत के कानूनों के तहत नियुक्ति/सेवायोजन संबंधी नियम बनाना।
16: संस्था की समस्त आय आयकर अधिनियम 1961 की धारा 11 (5) के तहत जमा करना।
संस्था की नियमावली
1.संस्था का नाम  ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब
2.संस्था का पूरा पता   जे 267, सेक्टर बीटा-2, ग्रेटर नोएडागौतमबुद्ध नगरउत्तर प्रदेश, 201308
3.संस्था का कार्य क्षेत्र  समस्य मेरठ मंडलमेरठ होगा
4.संस्था का वित्तीय वर्ष  01 अप्रैल से 31 मार्च
5.संस्था का उद्देश्य  इसके स्मृति पत्र के अनुसार होंगे।
6.संस्था की सदस्यता संस्था में निम्न प्रकार के सदस्य होंगे।
06(1): संस्थापक सदस्य:  
स्मृति पत्र में दिए गए प्रथम प्रबंध कारिणी के सभी सदस्य संस्था के संस्थापक सदस्य कहलाएंगे। इन सभी का कार्यकाल आजीवन होगा।
06(2): संरक्षक सदस्य
1: वह व्यक्ति जो संस्था की नियमावली में पूर्ण विश्वास रखता हो एवं संस्था की उन्नति के लिए कार्य करे, वह साधारण सभा की अनुमति से सलाहकार सदस्य बन सकता है।
2: ऐसे सदस्य को एकमुश्त 11 हजार रुपये की धनराशि देनी होगी। ऐसे सदस्यों का कार्यकाल आजीवन होगा।
3: ऐसे सदस्यों को मताधिकार नहीं होगा। किसी प्रकरण पर प्रबंधकारिणी या कोई पदाधिकारी इनसे सलाह कर सकता है।
4: ये लोग लिखित या मौखिक रूप से अपना मत संस्था को दे सकते हैं। जिस पर बैठकों में रखना होगा और मत पर विचार करना होगा।
5: इनका पत्रकार होना जरूरी नहीं होगा। ये किसी भी वर्ग और व्यवसाय से हो सकते हैं।
6: पत्रकारिता के आधार पर पूर्व में आजीवन सदस्य बने व्यक्ति को अगर बाद में सलाहकार सदस्य बनाया जाता है तो उसे मत देने का अधिकार रहेगा।
06(3): आजीवन सदस्य:
वह व्यक्ति जो संस्था के उद्देश्यों में रुचि रखता हो, 1,000 रुपये सदस्यता शुल्क दे और सदस्यता लेने के लिए आवश्यक अर्हताएं पूर्ण करेगावह संस्था का आजीवन सदस्य बन सकता है।
07: वार्षिक शुल्क:  वार्षिक शुल्क 101 रुपये सभी सदस्यों को देय होगा।
08: सदस्यता
संस्था का सदस्य बनने के लिए आवेदक की निम्नलिखित अर्हताएं अनवार्य हैं।
1: कोई भी स्त्री और पुरुष जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम नहीं हो और जनपद गौतमबुद्घ नगर में पत्रकारिता व्यवसाय में हो, वह कम से कम तीन वर्ष से किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में पत्रकारिता कर रहा हो।
2: वह किसी प्रकार के अपराध के लिए किसी न्यायालय द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया हो, दंडित नहीं किया गया हो।
3: संस्था के उद्देश्यों के प्रति वचनबद्घ हो, नियमों एवं उप नियमों का पालन करने के लिए सहमत होना चाहिए।
4: संस्था के संस्थापक सदस्यों को आजीवन सदस्यता के लिए एक हजार रुपए देने होंगे। सदस्यता शुल्क में वृद्घि या कटौती करने का अधिकार प्रबंधकारिणी को होगा।
5: किसी को सदस्य बनाने या किसी की सदस्यता समाप्त करने का निर्णय कार्यकारिणी में बहुमत के आधार पर लिया जाएगा। किसी को सदस्य बनाने का प्रस्ताव कोई भी सदस्य रख सकता है। अर्हताएं पूरी करने वाला व्यक्ति संस्था के कार्यालय में सीधे आवेदन कर सकता है।
6: आवेदन पत्र पर कम से कम तीन पुराने सदस्यों के हस्ताक्षर और उनके द्वारा निर्गत सहमति पत्र आवेदन पत्र के साथ संलग्न होने अनिर्वाय हैं।
7: संस्था का सदस्य बनने के बाद अगर किसी सदस्य का व्यवसायिक स्थानांतरण अन्यत्र हो जाता है तो उसकी सदस्यता समाप्त नहीं होगी।
8: स्थानांतरित हुआ सदस्य अगर संस्था में पदाधिकारी है तो उसे तत्काल अपने पद से त्याग पत्र देना पड़ेगा।
9: स्थानांतरित हुआ सदस्य संस्था के किसी भी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ेगा। उसे कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत किया जा सकता है। सलाहकार सदस्य घोषित किया जा सकता है। उसका मताधिकार पूर्ण रूप से सुरक्षित रहेगा।
10: आजीवन सदस्यों के लिए चुनाव लड़ने की उम्र आजीवन योग्य रहेगी।
09: सदस्यता से वंचित होना और सदस्यता समाप्ति
1: सदस्यता से स्वत: त्याग पत्र देने पर, ऐसी दशा में सदस्य अपना त्याग पत्र कार्य समिति के महासचिव को सौंपेगा।
2: मृत्यु हो जाने अथवा पागल हो जाने पर।
3: संस्था के नियमों या उप नियमों का उल्लंघन करने पर।
4: किसी सदस्य की अर्हताएं समाप्त होने या त्रुटि पाए जाने पर उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। सदस्यता समाप्ति का प्रस्ताव अनुशासन समिति की ओर से कार्यकारिणी के सामने रखा जाएगा। जिस पर निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
5: आरोपी सदस्य के खिलाफ प्रस्ताव आने पर संस्था के अध्यक्ष और महासचिव विचार करेंगे। अगर उचित समझे तो अंतिम निर्णय लेने तक आरोपी सदस्य की सदस्यता निलंबित करेंगे। उसके बाद महासचिव आरोपी सदस्य को नोटिस भेजकर जानकारी देगा। जिसमें आरोपों की जानकारी दी जाएगी।
6: आरोपी सदस्य को अपना पक्ष कार्यकारिणी के सामने रखने का अधिकार होगा। सदस्य अनुशासन समिति के अध्यक्ष या संस्था के महासचिव को लिखित में जवाब भेज सकता है। जवाब कार्यकारिणी के सामने रखा जाएगा।
7: कार्यकारिणी आरोपी सदस्य और अनुशासन समिति के तर्कों पर विचार करने के बाद सदस्यता समाप्त करने, चेतावनी देने, कुछ समय के लिए जो छह महीने से अधिक नहीं होगा सदस्यता निलंबन या आरोप मुक्त करने का निर्णय लेगी।
8: सदस्य के खिलाफ शिकायत मिलने पर अनुशासन समिति को अधिकतम तीन महीने में प्रस्ताव लाना अनिवार्य होगा। प्रस्ताव आने के बाद कार्यकारिणी द्वारा अधिकतम तीन महीने में अंतिम निर्णय लेना अनिवार्य होगा। अगर कार्यकारिणी ऐसा नहीं कर पाएगी तो सदस्यता के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव स्वत: खंडित मान लिया जाएगा।
9: सदस्यता समाप्त हो जाने पर सदस्य को उसका सदस्यता षुल्क वापस नहीं लौटाया जाएगा। इसके लिए वह कहीं कोई दावा करने का पात्र नहीं होगा।
10: अगर कोई सदस्य किसी न्यायालय द्वारा दो वर्ष से अधिक अवधि वाले कारावास से दंडित किया जाता है तो उसकी सदस्यता स्वत: समाप्त हो जाएगी। ऐसे सदस्य को कोई नोटिस, चेतावनी नहीं दी जाएगी। उसकी सफाई नहीं स्वीकार की जाएगी। अगर सदस्य पदाधिकारी है तो उसका पद स्वत: रिक्त हो जाएगा।
10: संस्था के अंग   संस्था के दो अंग होंगे, 1: साधारण सभा और 2: प्रबंधकारिणी
11: साधारण सभाउसके दायित्व एवं अधिकार
1: साधारण सभा संस्था का सर्वोच्च निकाय होगा। संस्था का प्रत्येक सदस्य इसका अंग होगा।
2: प्रत्येक दो वर्ष के पश्चात यह निकाय प्रबंध कारिणी का चुनाव करेगा। यह चुनाव प्रक्रिया पूर्ण करके या सर्व सम्मति से किया जा जाएगा।
3: संस्था का लेखा-जोखा साधारण सभा की प्रत्येक बैठक के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। महासभा की सहमति से ही भविष्य के कार्य एवं योजनाओं का संचालन हो सकेगा।
4: संस्था के नियमों, उप नियमों में बदलाव, रद्द करने या कोई नया नियम, उप नियम शामिल करने के लिए साधारण सभा की बहुमत से मंजूरी अनिवार्य होगी।
5: साधारण सभा का प्रत्येक सदस्य चुनावों में वोटर लिस्ट और अपने पहचान पत्र के आधार पर भाग लेगा।
6: प्रबंध कारिकणी का महासचिव, अध्यक्ष की सहमति से दो सप्ताह के नोटिस पर साधारण सभा की बैठक बुलाएगा। नोटिस में बैठक का दिन, दिनांक एवं समय स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। नोटिस ई-मेल, मोबाइल एसएमएस, पत्र, सामान्य रजिस्टर, समाचार पत्र में विज्ञापन या समाचार प्रकाशित करवाकर, रजिस्टर पर लिखकर व्यक्तिगत रूप से सदस्यों तक पहुंचाया जा सकता है। इन माध्यमों में से किसी भी माध्यम का प्रयोग किया जा सकता है।
7: साधारण सभा की बैठक साल में दो बार की जा सकती है। हर साल साधारण सभा की कम से कम एक बैठक की जानी अनिवार्य होगी।
8: साधारण सभा की बैठक में कार्यवाही शुरू करने के लिए कुल सदस्यों के 2/3 का उपस्थित होगा अनिवार्य होगा। अगर इतने सदस्य उपस्थित नहीं होंगे तो बैठक स्थगित कर दी जाएगी।
9: स्थगित बैठक का पुन: आयोजन सात दिन बाद किया जाएगा। अगर पुन: कोरम पूर्ति के लिए जरूरी 2/3 सदस्य उपस्थित नहीं होते तो बैठक की कार्यवाही बाधित नहीं मानी जाएगी।
10: बैठक में कोई प्रस्ताव पास करने के लिए बहुमत जरूरी होगा। उपस्थित सदस्यों की आधे से एक अधिक संख्या बहुमत मानी जाएगी।
12: प्रबंधकारिणीउसके दायित्व एवं अधिकार
1: प्रबंधकारिणी चुनाव अथवा सहमति से मनोनयन के आधार पर गठित होगी। यह निकाय संस्था के संचालन की जिम्मेदारी वहन करेगा।
2: प्रत्येक दो वर्ष बाद साधारण सभा द्वारा चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण करके या सर्व सम्मति के आधार पर प्रबंधकारिणी का गठन किया जाएगा।
3: प्रबंधनकारिणी, साधारण सभा के द्वारा लिए गए निर्णयों का अनुपालन करेगी। दैनिक कामकाज और प्रबंधन पर इसका नियंत्रण होगा।
4: संस्था के संचालन हेतु सभी तरह के अधिकार कार्य समिति के पास होंगे। लेकिन महत्वूपर्ण प्रशासनिक निर्णय अध्यक्ष को प्रबंधकारिणी के बैठक आयोजित करके लेने होंगे।
5: प्रबंधन कारिणी का महासचिव, अध्यक्ष की सहमति पर एक सप्ताह नोटिस देकर प्रबंधनकारिणी की बैठक आयोजित करेगा।
6: नोटिस में बैठक का दिन, दिनांक एवं समय स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। नोटिस ई-मेल, मोबाइल कॉल, टेलीफोन, एसएमएस, पत्र, सामान्य रजिस्टर, समाचार पत्र में विज्ञापन या समाचार प्रकाषित करवाकर, रजिस्टर पर लिखकर व्यक्तिगत रूप से सदस्यों तक पहुंचाया जा सकता है। इन माध्यमों में से किसी भी माध्यम का प्रयोग किया जा सकता है।
7: प्रबंधनकारिणी की बैठक कभी भी बुलाई जा सकती है। लेकिन प्रत्येक वर्ष कम से कम चार बैठकें होनी अनिवार्य हैं।
8: आपातकालीन परिस्थितियों में कार्य समिति की बैठक 24 घंटे पूर्व सूचना देकर बुलाई जा सकती है।
9: प्रबंधकारिणी के पदाधिकारी इसके अध्यक्ष के प्रति जवाबदेह होंगे। प्रबंधकारिणी के कार्यों का उत्तरदायित्व अध्यक्ष पर आरोपित रहेगा।
10: प्रबंधकारिणी की बैठकों के लिए कोरम कुल संख्या का 2/3 होगा। बहुमत उपस्थित सदस्यों की आधे एक अधिक संख्या होगी।
13: प्रबंधकारिणी के पदाधिकारीगण
1. अध्यक्ष एक
2.उपाध्यक्ष तीन
3.महासचिव एक
4.सचिव तीन
5.कोषाध्यक्ष एक
6.सदस्य 11
14(1) अध्यक्षनियुक्तिउसके दायित्व एवं अधिकार
1: अध्यक्ष की नियुक्ति चुनाव के माध्यम से अथवा महासभा की बैठक में सर्व सम्मति से की जाएगी।
2: महासभा और कार्य समिति की बैठकों की अध्यक्षता करेगा। दोनों निकायों की बैठक के कार्यवृत को संचालित करने का आदेश देगा।
3: किसी मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए अगर मतदान की स्थिति उत्पन्न होगी और पक्ष एवं विपक्ष में बराबर मत होंगे, ऐसी दषा में अध्यक्ष अपने मताधिकार का प्रयोग करेगा।
4: महासभा में पारित प्रस्तावों को लागू करने और उसके लिए कोई समिति या उप समिति गठित करने का अधिकार होगा।
5: ऐसी समितियों और उप समितियों के कामकाज और निर्णयों की समीक्षा और नियमन करने का अधिकार होगा।
6: कार्य समिति के पदाधिकारियों के कामकाज और दायित्वों निर्वाह की नियमित समीक्षा करने, सुझाव और निर्देश-आदेश देने का अधिकार होगा।
7: किसी आकस्मिक कार्य को करने के लिए 25,000 रुपए तक खर्च करने का निर्णय महासचिव और कोशाध्यक्ष के साथ मिलकर लेने का अधिकार होगा।
8: कार्य समिति अध्यक्ष की सहमति के बिना निर्णय नहीं लेगी। अगर किसी मुद्दे पर अध्यक्ष असहमत और कार्य समिति के सदस्य बहुमत में मुद्दे पर सहमत हैं तो, ऐसी दषा में कार्य समिति लिखित में निर्णय लेगी। निर्णय पत्र पर अध्यक्ष को हस्ताक्षर युक्त अपनी सहमति देनी होगी।
9: अपने कामकाज में सहयोग तीनों उपाध्यक्षों का सहयोग लेगा। उनके बीच संस्था के कामकाज का विभाजन करेगा।
10: अगर किसी भी कारण अध्यक्ष अपने पद से त्याग पत्र देगा तो वह अपना त्याग पत्र महासचिव को सौंपेगा।
14(2): उपाध्यक्षनियुक्तिउसके दायित्व एवं अधिकार
1: उपाध्यक्षों की नियुक्ति चुनाव के माध्यम से अथवा महासभा की बैठक में सर्व सम्मति से की जाएगी।
2: उपाध्यक्ष, अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उसके सभी अधिकारों, कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वाह करेंगे।
3: संस्था के तीनों उपाध्यक्ष समान अधिकारों के साथ संस्था में कार्यरत रहेंगे और कामकाज देखेंगे। इनमें कोई कनिष्ठ या वरिष्ठ नहीं होगा।
4: अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उसके दायित्वों का निर्वहन उपाध्यक्ष क्रमवार करेंगे। क्रम उनके नाम के आधार पर होगा। जो अंग्रेजी वर्णमाला से तय किया जाएगा।
5: अगर किसी भी कारण कोई उपाध्यक्ष अपने पद से त्याग पत्र देगा तो वह अपना त्याग पत्र अध्यक्ष को सौंपेगा।
6: तीनों उपाध्यक्ष प्रबंध कारिणी के अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करेंगे। दैनिक कामकाज की जानकारी अध्यक्ष को देंगे। अध्यक्ष के प्रति जवाबदेह होंगे।
14(3): महासचिवनियुक्तिउसके दायित्व एवं अधिकार
1: महासचिव की नियुक्ति चुनाव के माध्यम से अथवा महासभा की बैठक में सर्व सम्मति से की जाएगी।
2: महासभा और कार्य समिति की बैठकों का संचालन करेगा। दोनों निकायों की बैठक के कार्यवृत का लिखित ब्यौरा तैयार करेगा।
3: महासभा और कार्य समिति में लिए गए निर्णयों और पारित योजनाओं को क्रियान्वित करवाना। संस्था के नियमों एवं उप नियमों को लागू करना एवं संरक्षित रखना।
4: संस्था से जुड़े सभी तरह के पत्र व्यवहार करेगा। लिखित और मौखिक रूप से दिशा-निर्देश निर्धारित करेगा।
5: संस्था का वार्शिक लेखा-जोखा, आय-व्ययक तैयार करेगा। लेखा परीक्षा करवाएगा। लेखा परीक्षा में आईं आपत्तियों का निस्तारण करेगा। ये सारे कागजात और रिपोर्ट कार्य समिति और महासभा के सामने पेष करेगा।
6: संस्था के समस्त सदस्यों से जुड़े रिकॉर्ड और उन्हें दी गई सुविधाओं, आवंटित वस्तुओं का रिकॉर्ड तैयार करेगा और रिकॉर्ड संरक्षित रखेगा।
6: संस्था के आकस्मिक कामकाज के लिए अध्यक्ष और कोशाध्यक्ष के साथ मिलकर व्यय करने का निर्णय लेगा। संस्था के कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और सेवा समाप्ति पर निर्णय लेगा।
7: संस्था के लिए काम करने वाले कर्मचारियों, अधिकारियों और एजेंसियों के कामकाज की समीक्षा, नियंत्रण और आदेश-निर्देश देना।
8: संस्था के नियमों, उप नियमों में बदलाव, नए नियम बनाने, कोई नियम/उप नियम रद्द करने का प्रस्ताव लाएगा।
9: अध्यक्ष, महासभा या कार्य समिति के निर्णय पर गठित समितियों, उप समिति के अधिकार, कर्तव्य और कामकाम संबंधी नियम एवं उप नियम बनाएगा।
10: संस्था के तीनों सचिवों के कामकाज, दायित्व और अधिकार तय करेगा। इनके कार्यों की नियमित समीक्षा करेगा। इनका सहयोग लेगा और आवश्यकता पड़ने पर आदेश-निर्देश देगा।
11: अगर किसी भी कारण महासचिव अपने पद से त्याग पत्र देगा तो वह अपना त्याग पत्र अध्यक्ष को सौंपेगा।
14(4): सचिवनियुक्तिउनके दायित्व एवं अधिकार
1: सचिवों की नियुक्ति चुनाव के माध्यम से अथवा महासभा की बैठक में सर्व सम्मति से की जाएगी।
2: सचिव, महासचिव की अनुपस्थिति में उसके सभी अधिकारों, कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वाह करेगा।
3: संस्था के तीनों सचिव समान अधिकारों के साथ संस्था में कार्यरत रहेंगे और कामकाज देखेंगे। इनमें कोई कनिष्ठ या वरिष्ठ नहीं होगा।
4: महासचिव की अनुपस्थिति में उसके दायित्वों का निर्वहन उपाध्यक्ष क्रमवार करेंगे। क्रम उनके नाम के आधार पर होगा। जो अंग्रेजी वर्णमाला से तय किया जाएगा।
5: अगर किसी भी कारण कोई सचिव अपने पद से त्याग पत्र देगा तो वह अपना त्याग पत्र महासचिव को सौंपेगा।
6: तीनों सचिव प्रबंध कारिणी के महासिचव के निर्देशों का पालन करेंगे। दैनिक कामकाज की जानकारी महासचिव को देंगे। अध्यक्ष के प्रति जवाबदेह होंगे।
14(5): कोषाध्यक्षनियुक्तिउसके दायित्व एवं अधिकार
1: कोषाध्यक्ष की नियुक्ति चुनाव के माध्यम से अथवा महासभा की बैठक में सर्व सम्मति से की जाएगी।
2: कार्य समिति एवं संस्था के आय-व्यय का हिसाब सुचारू रूप सं संचालित करेगा।
3: संस्था का सारा कोश इसके संरक्षण में होगा। बैंकिंग से जुड़ी समस्त प्रक्रियाओं के संचालन का अधिकार होगा।
4: चंदा, अनुदान, सदस्यता शुल्क एवं अन्य किसी भी मद से प्राप्त धन का लेखा-जोखा रखेंगे। समय-समय पर अध्यक्ष और महासचिव से इन मुद्दों पर बैठक और विचार-विमर्श करेगा।
5: आयकर अधिनियम, सेवाकर अधिनियम समेत राज्य और केंद्र सरकार के वित एवं लेखा से जुड़े कानून, नियमों का पालन करेगा। महासचिव को इनसे जुड़ी सूचनाएं तुरंत देगा।
6: वित्त एवं लेखा व्यवस्था से संबंधित कामकाज के लिए अधिवक्ता, चार्टेड एकाउंटेंट आदि का सहयोग लेगा।
7: अगर किसी भी कारण कोषाध्यक्ष अपने पद से त्याग पत्र देगा तो वह अपना त्याग पत्र महासचिव को सौंपेगा।
14(6): प्रबंध कारिणी के सदस्यउनके दायित्व एवं अधिकार
1: प्रबंधन कारिणी के उद्देश्यों के लिए कार्य समिति और महासभा में प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अधिकार होगा।
2: बैठकों के संचालन में सहयोग देंगे। किसी प्रकरण पर सहमति नहीं बनने पर मत विभाजन की स्थिति में अपना मत देंगे।
3: संस्था के कामकाज में सक्रिय रहेंगे। पदाधिकारियों को क्रियात्मक सहयोग देंगे। जरूरत पड़ने पर कार्य समिति किसी सदस्य को किसी पद पर कार्यवाहक पदाधिकारी नियुक्त कर सकती है।
15: चुनाव
1: प्रबंधन कारिणी के पदाधिकारियों का चुनाव प्रत्येक दो वर्ष में किया जाएगा।
2: साधारण सभा का प्रत्येक सदस्य चुनाव की वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक चुनाव से पूर्व वोटर लिस्ट नए सिरे से तैयार की जाएगी। वोटर लिस्ट संस्था के कार्यालय में सार्वजनिक की जाएगी।
3: अगर कोई सदस्य वोटर लिस्ट की प्रति लेना चाहेगा तो उसे तय शुल्क लेकर वोटर लिस्ट की सत्यापित प्रति उपलब्ध करवाई जाएगी।
4: चुनाव प्रक्रिया संपन्न करवाने के लिए एक चुनाव अधिकारी और उसके दो सहायक चुनाव अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। इनकी नियुक्ति महासभा की उस बैठक में होगी, जो चुनाव तिथि से पूर्व संपन्न होगी।
5: चुनाव अधिकारी और सहायक चुनाव अधिकारी संस्था के सदस्यों, पदाधिकारियों, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, अधिवक्ता और सेवानिवृत्त न्यायाधीश को बनाया जा सकता है।
6: चुनाव अधिकारी और दोनों सहायक अधिकारी परस्पर सहमति के आधार पर नामांकन की तिथि, नाम वापसी की तिथि, मतदान की तिथि, मतगणना और परिणाम घोषणा की तिथि तय करेंगे।
7: नामांकन पत्र प्रारूप निर्धारित करके प्रकाशित किए जाएंगे। जिनकी विक्रय दरें और नामांकन राशि चुनाव अधिकारी तय करेंगे।
8: नामांकन राशि और नामांकन पत्र की कीमत किसी भी विजयी या पराजित उम्मीदवार को वापस नहीं की जाएगी।
9: किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ने की योग्यता संस्था का सदस्य बनने की योग्यता के समान होगी।
10: चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र पर पांच प्रस्तावक और पांच अनुमोदकों के हस्ताक्षर होने चाहिएं।
11: मतगणना का परिणाम आने के बाद चुनाव अधिकारी सभी विजयी उम्मीदवारों को एक नियत प्रारूप पर प्रमाण पत्र जारी करेंगे। जो एक वैधानिक दस्तावेज होगा।
12: कार्य समिति का कार्यकाल परिणाम घोषणा के प्रमाण पत्र पर अंकित तिथि से ठीक दो वर्ष तक माना जाएगा।
13: अगर किन्हीं कारणों से ऐसा प्रतीत हो कि चुनाव निर्धारित समय में नहीं हो पाएगा तो कार्य समिति बहुमत से कारण बताते हुए लिखित एवं हस्ताक्षरित प्रस्ताव बनाएगी। साधारण सभा की बैठक का आयोजन करेगी। साधारण सभा में प्रस्ताव बहुमत के आधार पर पारित करवाएगी। इससे कार्य समिति का कार्यकाल तीन महीने बढ़ जाएगा।
14: ऐसा प्रस्ताव कार्य समिति अधिकतम दो बार पारित करवा सकेगी। मतलब, अपरिहार्य परिस्थितियों में कार्य समिति को दो साल के बाद अधिकतम छह माह का कार्यकाल विस्तार हासिल हो सकता है।
15: दूसरी बार विस्तारित कार्यकाल हासिल करने के लिए बुलाई गई बैठक में ही चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी घोषणाएं करनी अनिवार्य होंगी।
16: आय-व्यय का लेखा
संस्था का कोष निम्न प्रकार से संचित होगा।
1. संस्था के सदस्यों द्वारा प्रदत्त चंदे और शुल्क द्वारा
2. दान, अनुदान और ऋण द्वारा
3. राजकीय अनुदान, संगठनों द्वारा प्रदत्त ऋण द्वारा
4. समिति का कोष किसी बैंक में सुरक्षित रखा जाएगा। जिसके लिए चालू, बचत, फिकराह, आवर्ती जमा खाता खोला जा सकता है।
5. बैंकों से लेनदेन कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर एवं अध्यक्ष या महासचिव में से किसी एक के हस्ताक्षर के साथ होगा।
6. बैंक खाते कई नगरों, बैंकों में परिस्थिति के अनुसार खोले जा सकते हैं।
17 संस्था के नियमों-विनियमों में संशोधन
संस्था के नियमों एवं विनिमयों में संशोधन प्रक्रिया साधारण सभा की अनुमति से साधारण सभा द्वारा 2/3 बहुमत होने पर मान्य होगा।
18: कानूनी कार्यवाही
1. संस्था की समस्त कानूनी कार्यवाही महासचिव द्वारा की जाएगी।
2. संस्था का न्यायिक क्षेत्र गौतमबुद्ध नगर होगा। सभी प्रकार के दावे इसी स्थान से संस्था पंजीकरण अधिनियम 1860 के अनुसार निस्तारित किए जाएंगे।
19: संस्था के अभिलेख
निम्न अभिलेखों का रखरखाव सचिव और कोषाध्यक्ष आवश्यकतानुसार करेंगे।
1. सदस्यता रजिस्टर
2. एजेंडा रजिस्टर
3. कार्यवाही रजिस्टर
4. स्टॉक रजिस्टर
5. डाक रजिस्टर
6. कैश बुक
7. लैजर
8. रसीद बुक आदि
20: संस्था का विघटन
किन्हीं कारणों से संस्था का विघटन संस्था पंजीकरण अधिनियम 1860 की धारा 13 और 14 के अनुसार किया जाएगा।
दिनांक: 02 मई, 2013   मेरठ